Thursday, June 25, 2009

जिंदगी ये सफर में है

Translation:

This life is in journey and
The distance is being travelled
Though I Do have a companion
Yet the paths are separate

In the heat of tears, someone is walking towards here
In the shade of Laughs, someone is burning there.
Someone lost somebody while
Someone got reunited with somebody

Despite having desires for being together
There are distances between
Although the heart beats are one
Yet, there are these distances
Someone loves somebody while
someone is cross with somebody

Original:


Hmmm Hmmmmm Hm Hm
Hmmm Hmmmmm Hm Hm
जिंदगी ये सफर में है, कट रहा है रास्ता
जिंदगी ये सफर में है, कट रहा है रास्ता
हमसफर तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा
हमसफ़र तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा

जिंदगी ये सफर में है, कट रहा है रास्ता
जिंदगी ये सफर में है, कट रहा है रास्ता
हमसफर तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा
हमसफ़र तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा



Hmmm Hmmmmm Hm Hm
Hmmm Hmmmmm Hm Hm




आसुओं की धुप में, कोई चल रहा इधर
आसुओं की धुप में, कोई चल रहा इधर


कह्खाहो की में, कोई चल रहा उधर


किसी से गुम हुआ, कोई किसी को मिल
किसी से गुम हुआ, कोई किसी को मिल

हमसफर तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा
हमसफ़र तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा

Sa Ni Ni Sa, Ni Sa Ni Sa, Sa Re Re Re
Sa Ni Ni Sa, Ni Sa Ni Sa, Sa Re Re Re
Sa Ni Ni Sa, Ni Sa Ni Sa, Sa Re Re Re

Ni Pa Ni Pa Ni, Pa Ni Pa Ni Sa

Sa Ni Ni Sa, Ni Sa Ni Sa, Sa Re Re Re
Sa Ni Ni Sa, Ni Sa Ni Sa, Sa Re Re Re
Sa Ni Ni Sa, Ni Sa Ni Sa, Sa Re Re Re

Sa Re Re Pa Re Re, Ma Re Re Sa

Hai Milan Ki Chahtein, Fasle Hai Darminyan
Hai Milan Ki Chahtein, Fasle Hai Darminyan
Dhakane To Ek Hai, Phir Bhi Hai Yehj Dooriyan

Koi Kisi Ko Hai Chahata, Koi Kisi Se Hai Khafa
Koi Kisi Ko Hai Chahata, Koi Kisi Se Hai Khafa

हमसफर तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा
हमसफ़र तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा

जिंदगी ये सफर में है, कट रहा है रास्ता
जिंदगी ये सफर में है, कट रहा है रास्ता
हमसफर तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा
हमसफ़र तो है मगर, मंजिलें है जुदा जुदा

Saturday, June 13, 2009

लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

One of the masterpieces nazm by Allama Iqbal which goes - "Lab pe aati hai dua ..."
It is a kind of dua (prayer) which asks God to bless us with some beautiful things like love for the entire world, love for one's country, love for knowledge that becomes a blessing for the entire mankind and lastly, compassion for all human beings.
This soulful nasheed has been sung by melodious but a little unheard singer -- Siza

लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी
जिंदगी शम्मा की सूरत हो खुदाया मेरी

हो मेरे दम से यूं ही मेरे वतन की जीनत
जिस तरह फूल से होती है चमन की जीनत

जिंदगी हो मेरी परवाने की सूरत या रब
इल्म की शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रब

हो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत करना
दर्दमंदों से ज़ईफों से मोहब्बत कराना

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस राह पे चलाना मुझको

मुख्तलिफ अशार .... मौसुकी की दुनिया के चन्द चुनिन्दा शेर

तुझसे दूर रहने का एक सबब यह भी है, फिराज़,
सुना है रोज़ मिलने वालों को कोई याद नहीं

ज़िन्दगी जब भी...तेरी बज़्म में लाती है हमे....
यह ज़मीं चाँद से बहेतर नज़र आती है हमे

Tuesday, July 29, 2008

बहादुर शाह ज़फर - कभी ऎसी तो न थी

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तेरी महफिल कभी ऐसी तो न थी

ले गया छीन के कौन आज तेरा सब्र-ओ-करार
बेकरारी तुझे ए दिल कभी ऐसी तो न थी

चश्म-ऐ-कातिल मेरी दुश्मन थी हमेशा लेकिन
जैसे हो गई कातिल कभी ऎसी तो न थी

उन की आँखों ने खुदा जाने किए क्या जादू
के तबीयत मेरी माईल कभी ऎसी तो न थी

अक्स-ऐ-रुख -यार ने किस से तुझे आज है चमकाया
ताब तुझ में माह-ऐ-कामिल कभी ऎसी तो न थी

क्या सबब तू जो बिगरता है “ज़फर” से हर बार
खू तेरी हूर-ऐ-शमाइल कभी ऎसी तो न थी

बहादुर शाह ज़फर की आखरी ग़ज़ल

लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में
किसकी बनी है आलमे-ना-पायदार में

बुलबुल को बाग़बां से न सय्याद से गिला
क़िस्मत में क़ैद थी लिखी फ़स्ले-बहार में

कहदो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहां है दिले दाग़दार में

एक शाख़े-गुल पे बैठ के बुलबुल है शादमां
कांटे बिछा दिए हैं दिले-लालज़ार में

उम्रे-दराज़ मांग के लाए थे चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में

दिन ज़िंदगी के ख़त्म हुए शाम हो गई
फैला के पांव सोएंगे कुंजे मज़ार में

कितना है बदनसीब ज़फ़र दफ़्न के लिए
दो गज़ ज़मीं भी मिल न सकी कूए-यार में

Translation:

My heart is not happy in this despoiled land
Who has ever felt fulfilled in this transient world

The nightingale laments neither to the gardener nor to the hunter
Imprisonment was written in fate in the season of spring

Tell these emotions to go dwell elsewhere
Where is there space for them in this besmirched heart

I had requested for a long life a life of four days
Two passed by in pining, and two in waiting.

The days of life are over, Its evening of death,
Now I can sleep without any stress forever in my tomb

How unlucky is Zafar! For burial
Even two yards of land were not to be had, in the land of the beloved.

Monday, July 7, 2008

एक सच अधूरा सा......

अपनी तन्हाई मेरे ख्वाब से आबाद करता
कभी वो भी मुझे उस नाम से याद करता
मुद्दतों से क़ैद है जिसकी मुट्ठी में मेरा वजूद
एक रोज़ मेरा वो माजी मुझे आज़ाद करता

जुगनुओं सा सताता उसे मेरा ख्याल हर शब्
कभी सांसों से मेरे उसका भोर महक जाता
मेरा हर शब्द जब उसके होटों पे उभर आता
सोचता हूँ फिर मेरे सुनने को क्या रह जाता

Thursday, July 3, 2008

वादे............

आदतन तुमने हमसे कर दिए वादे, आदतन हमने भी तेरा ऐतबार किया
तेरी राहों बार बार रुक कर, हमने खुद का ही इतेज़ार किया
अब न मांगेगे तुझसे ये ज़िन्दगी या रब्ब , ये गुनाह हमने बस एक बार किया

तुम तो आए नही, लो वक्त-ऐ-रुखसत भी आ गया
शब्-ऐ-वस्ल और फुरकत के बीच का वोह लम्हा कहाँ गया
आ थाम ले मेरी रूह को, सपनो की जुबान भी सुन ले आज

तुमने चाहा ही नही, कुछ हालात इधर भी बदल सकते थे
सोग से भीगे कुछ आंसू तेरे लबों पर छलक सकते थे
बंटे रहें सागर के किनारों के तरह, एक और सफर हमने फ़िर तनहा तय किया