Saturday, June 13, 2009

मुख्तलिफ अशार .... मौसुकी की दुनिया के चन्द चुनिन्दा शेर

तुझसे दूर रहने का एक सबब यह भी है, फिराज़,
सुना है रोज़ मिलने वालों को कोई याद नहीं

ज़िन्दगी जब भी...तेरी बज़्म में लाती है हमे....
यह ज़मीं चाँद से बहेतर नज़र आती है हमे

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